Detailed Notes on Hanuman Chalisa Lyrics

बरनउं रघुबर विमल जसु, जो दायकु फल चारि॥लाय सजीवन लखन जियाये। श्रीरघुवीर हरषि उर लाये॥जनम जनम के दुख बिसरावै ॥३३॥ अन्त काल रघुबर पुर ज�

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